श्यामल सरिता

आचार्य श्री भागवत पाठक श्यामल की साहित्य सरिता

Thursday, April 11, 2024

शिवायन

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 श्री कृष्णुम्बहू भर्तारम व्यक्तं वन्दे शिवायनम  विश्वोद्भव स्थितिलयाय शुभंकराय भक्तार्तिनाशनरताय दिगम्बराय  यक्षस्वरूप परकारण कारणाय नित्यं...
Tuesday, February 23, 2021

नंदन वन में

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बैद्यनाथ साहित्योत्सव  कविता विहरत नन्दन वन में, तीन दोष की औषधि ढूंढत बैद्यनाथ के वन में। भाव छँद रस भूषित अक्षर  शंकर के नर्तन में। पद विक...
Tuesday, February 5, 2019

साम्प्रदायिक एकता की तपोभूमि

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साम्प्रदायिक एकता की तपोभूमि  (आज की संकीर्ण मनोवृति पर मूक अट्टहास)                     उत्तरी छोटानागपुर के गिरिडीह जिले एक छोटा सा क़स...
Saturday, October 27, 2018

हालात क्या है यहाँ

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परम् पूज्य हे परमपिता,हमें जो भेजा तूने यहाँ हालात जो फिलहाल है, करता हूँ उसको बयाँ। नाम के लिए भी होते हैं बड़े काम यहाँ काम करनेवाले भी ...
Thursday, March 22, 2018

श्यामल परिचय

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आचार्य श्री भागवत पाठक "श्यामल" संस्कृत और हिन्दी साहित्य के प्रखर विद्वान हैं। उन्होंने सैकड़ों अद्वितीय रचनाएं रची है लेकिन अर्थ...

उन्मुक्त तन्त्र

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उन्मुक्त-तन्त्र ************ उन्मुक्त हुई, कविता वनिता खोकर शृंखलता,संयमिता। मदिरा से कर, मन विह्वल देखे जिसने, वे नयन तरल। रंजित अधर...
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पंकज प्रियम
# पंकज प्रियम ### पत्रकारिता से साहित्य तक—शब्दों के माध्यम से समाज से संवाद **पंकज प्रियम** एक वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, साहित्यकार और सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़े रचनात्मक व्यक्तित्व हैं। लगभग **25 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता, मीडिया और सामाजिक विकास** के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने समाज और समय को नजदीक से देखा, समझा और अपनी लेखनी के माध्यम से उसे अभिव्यक्त किया है। पत्रकारिता उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि **समाज के प्रति जिम्मेदारी और जनसरोकारों को आवाज देने का माध्यम** रही है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए उन्होंने समाचार, जनसमस्याओं, सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण विकास और समसामयिक विषयों पर निरंतर काम किया है। साहित्य उनकी रचनात्मक चेतना का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है। **कविता, काव्य, साहित्यिक आलेख, संस्कृति, इतिहास, राष्ट्रबोध और भारतीय जीवन-मूल्यों** से जुड़े विषय उनकी लेखनी के प्रमुख क्षेत्र हैं। उनकी रचनाओं में संवेदना, सामाजिक चेतना और भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि का समन्वय दिखाई देता है। पंकज प्रियम **साहित्योदय** के संस्थापक हैं। साहित्योदय के माध्यम से साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करने तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास कि
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